Our social:

30 नव॰ 2025

RCA में प्रशासनिक पतन:

https://www.cricketerview.blogpost.com

5 खुलासे जो राजस्थान क्रिकेट को डुबो सकते हैं

राजस्थान क्रिकेटर संगठन में जारी सियासी घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। खिलाड़ियों के सिलेक्शन में हो रही गड़बड़ी के बाद अब एडहॉक कमेटी द्वारा बनाई गई ऑब्जरवेशन कमेटी के सदस्य सोमेंद्र तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही तिवाड़ी ने मौजूदा एडहॉक कमेटी पर लोढ़ा कमेटी के नियमों के उल्लंघन के साथ ही सिलेक्शन में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए हैं।
Image

Introduction राजस्थान में क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक जुनून है। मैदान पर जब खिलाड़ी पसीना बहाते हैं, तो लाखों प्रशंसक अपनी सांसें थाम लेते हैं। लेकिन पर्दे के पीछे एक अलग ही खेल चल रहा है—सत्ता, राजनीति और वर्चस्व का एक ऐसा खेल, जो राज्य में क्रिकेट के भविष्य को ही खतरे में डाल रहा है। यह लेख राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के भीतर चल रही उथल-पुथल के पांच सबसे चौंकाने वाले और प्रभावशाली पहलुओं को उजागर करेगा, जो हाल की घटनाओं और आरोपों पर आधारित हैं।

  • 1. जब निगरानी करने वाले ने ही छोड़ दिया मैदान
  • 2. आरोपों का चक्रव्यूह:
  • 3. नियमों की अनदेखी:
  • 4. असली कीमत चुका रहे हैं खिलाड़ी::
  • 5. प्रशासनिक लकवा:

सिलेक्शन में धांधली से तंग आकर ऑब्जरवेशन कमेटी सदस्य का इस्तीफा
सबसे पहले, ऑब्जरवेशन कमेटी के उद्देश्य को समझना ज़रूरी है। इस कमेटी का गठन यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि चयन समिति (Selection Committee) द्वारा खिलाड़ियों के चयन में पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता बरती जाए। यह एक तरह से चयन प्रक्रिया पर निगरानी रखने वाली संस्था थी।
लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब इसी कमेटी के एक वरिष्ठ सदस्य, सोमेंद्र तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। तिवारी के इस्तीफे का कारण चौंकाने वाला था: उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी कमेटी को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा था और खिलाड़ियों के चयन में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंडर-23, अंडर-16 और महिला टीमों में ऐसे खिलाड़ियों को जगह दी जा रही थी जो इसके हकदार नहीं थे, जबकि योग्य खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा था।
सोमेंद्र तिवारी ने अपनी पीड़ा इन शब्दों में व्यक्त की:
"मुझे ऑब्जरवेशन कमेटी का सदस्य नियुक्त किया था। इस कमेटी का गठन इसलिए किया गया था, ताकि सिलेक्शन कमेटी में कोई भी किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो और किसी सही खिलाड़ी के साथ अन्याय ना हो सके। लेकिन यहां पर तो उल्टा हो रहा है, कुछ खिलाड़ी जहां डिजर्व करते हैं। उनको जगह नहीं मिल रही थी, जबकि जो डिजर्व नहीं करते वह खिलाड़ी टीम में खेले जा रहे हैं।"
यह घटना एक गहरी प्रणालीगत विफलता को उजागर करती है। किसी बाहरी आलोचक का नहीं, बल्कि व्यवस्था के एक वरिष्ठ प्रहरी का यह कदम, आरोपों को विश्वसनीय बनाता है और यह संकेत देता है कि समस्या सतही नहीं, बल्कि संस्थागत है।
-------------------------------------------------------------------------------- संयोजक ने जांचकर्ताओं पर ही लगा दिया करोड़ों के घोटाले का आरोप
मामले की शुरुआत तब हुई जब एड-हॉक कमेटी के संयोजक, दीनदयाल (DD) कुमावत के खिलाफ एक सरकारी जांच शुरू की गई। कमेटी के चार अन्य सदस्यों—पिंकेश जैन, मोहित यादव,
आशीष तिवारी और धनंजय सिंह खींवसर—ने उन पर खिलाड़ियों के चयन, होटल बुकिंग, किट की खरीद में अनियमितता और एकतरफा फैसले लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए।
लेकिन इस कहानी में एक सनसनीखेज मोड़ तब आया जब कुमावत ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए एक बड़ा पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि यह उन्हें डराने की एक साजिश है क्योंकि उन्होंने राजस्थान खेल परिषद के भीतर 9 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के घोटाले को उजागर किया था।
उन्होंने इस "प्रोपगेंडा" को आकर्षक आईपीएल आयोजनों से जोड़ते हुए सीधे तौर पर एक वरिष्ठ अधिकारी, नीरज कुमार पवन, जो उनके अनुसार एक "कांग्रेस विचारधारा से जुड़े अधिकारी" हैं, को भी इसमें शामिल बताया।
यह घटनाक्रम मामले को केवल जटिल नहीं बनाता, बल्कि यह आरोपी द्वारा जांच की दिशा को ही मोड़ने का एक प्रयास है। 9 करोड़ के बड़े घोटाले का आरोप लगाकर, कुमावत अपनी जांच को एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताने की कोशिश कर रहे हैं, जो क्रिकेट प्रशासन में एक जानी-मानी राजनीतिक रणनीति है।
-------------------------------------------------------------------------------- जिस लोढ़ा कमेटी को सबसे पहले अपनाया, उसी को अब भुलाया
भारतीय क्रिकेट प्रशासन में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लोढ़ा कमेटी का गठन किया गया था। यह क्रिकेट प्रशासन के लिए एक मील का पत्थर था।
विडंबना यह है कि, जैसा कि सोमेंद्र तिवारी ने बताया, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) पूरे भारत में पहली एसोसिएशन थी जिसने लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को अपनाया था। यह उस
समय सुधार के प्रति RCA की प्रतिबद्धता को दर्शाता था। लेकिन आज की हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। तिवारी ने अफ़सोस जताते हुए कहा कि अब RCA के भीतर उन्हीं नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है जिन्हें उसने सबसे पहले अपनाया था।
यह सिर्फ नियमों को तोड़ने का मामला नहीं है; यह एक संस्था द्वारा उन सुधारवादी सिद्धांतों को त्यागने जैसा है जिसका उसने कभी नेतृत्व किया था। इससे यह प्रतीत होता है कि सुधारों को अपनाना शायद एक सतही अनुपालन था, न कि सुधार के प्रति कोई वास्तविक प्रतिबद्धता।
-------------------------------------------------------------------------------- सियासी जंग में पिस रहा है राजस्थान का क्रिकेट टैलेंट
इस प्रशासनिक युद्ध में सबसे बड़ा नुकसान राजस्थान के युवा क्रिकेटरों को हो रहा है। अंडर-23 और अंडर-16 टीमों से लेकर महिला टीमों तक, हर स्तर पर चयन प्रक्रिया से समझौता किया जा रहा है, जिसका सीधा असर खिलाड़ियों के भविष्य पर पड़ रहा है।
मूल समस्या वही है जिसे सोमेंद्र तिवारी ने उजागर किया था: "नॉन-परफॉर्मर्स" को टीमों में जगह मिल रही है, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को बाहर रखा जा रहा है।
इस आंतरिक राजनीतिक जंग ने राजस्थान की क्रिकेट गतिविधियों पर एक गहरा साया डाल दिया है, जिससे खिलाड़ियों और भविष्य के टूर्नामेंटों को लेकर भ्रम और अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है।
अंततः, जब प्रशासक लड़ते हैं, तो खेल की भावना मर जाती है, और प्रतिभाशाली एथलीटों के सपनों की सबसे पहले बलि चढ़ती है।
-------------------------------------------------------------------------------- बैठकें अवैध,
फैसले एकतरफा,
और RCA का भविष्य दांव पर
RCA का संचालन करने वाली एड-हॉक कमेटी पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुकी है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण सदस्यों के परस्पर विरोधी दावे हैं। एक तरफ, धनंजय सिंह खींवसर ने आशीष तिवाड़ी और पिंकेश पोरवाल के साथ हुई एक बैठक के बाद आरोप लगाया कि पिछले साढ़े तीन महीनों में कोई बैठक नहीं बुलाई गई, जिससे संयोजक डीडी कुमावत एकतरफा फैसले ले रहे हैं। इस बैठक में मोहित यादव अनुपस्थित रहे।
वहीं दूसरी ओर, कुमावत का दावा है कि अन्य सदस्यों द्वारा बुलाई गई यह बैठक अवैध थी, क्योंकि "आज की बैठक में शामिल तीन में से एक सदस्य सस्पेंड है"
और बैठक के लिए उचित सात-दिन का नोटिस भी नहीं दिया गया था।
प्रक्रियात्मक वैधता को लेकर यह टकराव इतना बढ़ गया है कि शासन व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है और अब यह मामला लोकपाल तक पहुंच गया है।
यह गतिरोध केवल प्रक्रियात्मक विवादों के बारे में नहीं है; यह सामूहिक नेतृत्व के पूर्ण पतन का प्रतीक है, जिसने पूरे संघ को दिशाहीन बना दिया है और इसके भविष्य को दांव पर लगा दिया है।

सोमेंद्र तिवारी ने राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की ऑब्जरवेशन कमेटी के सदस्य पद से इस्तीफा निम्नलिखित मुख्य कारणों से दिया:

1. खिलाड़ियों के सिलेक्शन में हो रही गंभीर गड़बड़ियां
तिवारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने यह इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि खिलाड़ियों के सिलेक्शन में गड़बड़ी नहीं रुक रही थी।
• मूल उद्देश्य की विफलता: उन्हें ऑब्जरवेशन कमेटी का सदस्य इसलिए नियुक्त किया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सिलेक्शन कमेटी में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो और किसी सही खिलाड़ी के साथ अन्याय न हो सके।
• अयोग्य खिलाड़ियों का चयन: तिवारी ने आरोप लगाया कि वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत थी। जो खिलाड़ी योग्य (डिजर्व) हैं, उन्हें जगह नहीं मिल रही थी, जबकि जो खिलाड़ी डिजर्व नहीं करते या जो नॉन परफॉर्मर हैं, वे खिलाड़ी टीम में खेले जा रहे थे।
• गलत फैसले: उन्होंने बताया कि अंडर-23 टीम से लेकर अंडर-16 टीम तक, और यहाँ तक कि विमेंस टीम में भी खिलाड़ियों के सिलेक्शन में गलत फैसले लिए गए।
2. लोढ़ा कमेटी के नियमों और पारदर्शिता का उल्लंघन
तिवारी ने RCA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि संस्था संवैधानिक नियमों का पालन नहीं कर रही है:
• उन्होंने याद दिलाया कि RCA वह पहली संस्था थी जिसने भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित लोढ़ा कमेटी के नियमों को माना था, लेकिन अब RCA में उन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
• ओवरसाइट कमेटी की अनदेखी:
उन्होंने आरोप लगाया कि हालात इतने बिगड़ गए थे कि बिना ऑब्जर्वर कमेटी के ही फैसले लिए जा रहे थे और टीमों में खिलाड़ियों को शामिल किया जा रहा था।
3. अपमान और मनोबल पर नकारात्मक असर
सोमेंद्र तिवारी ने महसूस किया कि कमेटी में रहने का कोई औचित्य नहीं था, क्योंकि उनकी बातों को अनदेखा किया जा रहा था:
• उन्होंने कहा कि यह स्थिति चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है और खिलाड़ियों के मनोबल पर भी नकारात्मक असर डालती है।
• तिवारी ने कहा कि यह सिर्फ उनका नहीं, बल्कि ऑब्जर्वर कमेटी के सभी सदस्यों का अपमान है। उन्होंने अन्य सदस्यों को भी इस्तीफा देने का सुझाव दिया ताकि RCA में हो रही गड़बड़ी का सबको पता चल सके।
सोमेंद्र तिवारी ने प्रशासनिक अपारदर्शिता, चयन प्रक्रिया में अन्याय, और लोढ़ा नियमों के उल्लंघन के विरोध में इस्तीफा दिया, क्योंकि वह इस पद पर बने रहना उचित नहीं समझते थे।

Conclusion

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में उथल-पुथल सिर्फ एक सत्ता संघर्ष से कहीं बढ़कर है। यह भ्रष्टाचार के आरोपों, नियमों की अवहेलना और प्रशासनिक लकवे का एक बहुआयामी संकट है,
जिसका सबसे ज़्यादा खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। यह संकट दिखाता है कि जब व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं खेल की भलाई पर हावी हो जाती हैं, तो पूरी व्यवस्था कैसे चरमरा जाती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है: "जब तक अधिकारी अपनी सियासी बिसात बिछाते रहेंगे, तब तक कितने प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर लगता रहेगा?"

Follow Me

------------------------------------------------------------------------------ :-----------------------------------------------------------------